कोरोना के नए वेरिएंट को देखते हुए, वैक्सीन को और ताकतवर बनाने पर विमर्श कर रही सरकार…

कोरोना के नए वेरिएंट को देखते हुए, वैक्सीन को और ताकतवर बनाने पर विमर्श कर रही सरकार…

कोरोनावायरस के बाद -बार बदल रहे वैरीएंट यानी की बहुरूपिया वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन को और भी ताकतवर बनाने को लेकर देश और विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं।

रिया पांडेय, द दैनिक बिहार : बहुरूपिया कोरोनावायरस अब डबल म्यूटेंट डेल्टा वैरीएंट हो चला है। अमेरिका और ब्रिटेन में हुए शोध में पता चला है कि पुराने वायरस के मुकाबले कोरोना के नए वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन यानी एमिनो एसिड में बदलाव हुआ है। इस शौध को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित किया गया है। इस नए वैरिएंट से निपटने के लिए अब वैक्सीन को और भी ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए मंथन शुरू हुआ है। देश-विदेश के विशेषज्ञ वेबीनार के जरिए इस पर विमर्श कर रहे हैं। इसमें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोजी विभाग के प्रोफेसर डॉ विकास मिश्रा भी शामिल है। ये सभी विशेषज्ञ अपने सुझाव लगातार केंद्र सरकार को दे रहे हैं।

नई वैरीएंट डेल्टा ने बढ़ाई मुश्किलें
कोरोना संक्रमण की चपेट में आज पूरा विश्व है। कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडी और हाई इम्यूनिटी की मात्रा बढ़ाने के लिए वैक्सीनेशन चल रहा है। इस बीच, कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा ने देश-विदेश में खतरा बढ़ गया है। नए वेरिएंट अप्रैल के शुरुआत में ब्रिटेन में 1 फ़ीसदी केस थे, जो कि मई के आते आते 75 फ़ीसदी हो गए । विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन में पुराने वैरीअंट खत्म होते ही नए वेरिएंट ने उसकी जगह ले ली। इसीलिए सिर्फ 45 दिन के अंदर 74 फ़ीसदी केस बढें हैं, जिससे वहां तीसरी लहर आने की आशंका बढ़ गई है।

नए वेरिएंट से वैक्सीन के असर पर विमर्श
ब्रिटेन और अमेरिका में नए डेल्टा वैरिएंट पर वैक्सीन के प्रभाव के अध्ययन के लिए कोविशील्ड व फाइजर की वैक्सीन लगवाने वाले दो अलग-अलग समूह को लिया गया ।इसमें पाया गया कि पहली डोज लगवाने वाले महज 30 फ़ीसदी सुरक्षित पाए गए । वही वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने वालों में दोनों वैक्सीन के डाटा अलग-अलग पाए गए। कोविशील्ड लगवाने वालों में 60 फ़ीसदी सुरक्षित हुए, जबकि फाइजर की वैक्सीन लगवाने वाले 80 फ़ीसदी सुरक्षित पाए गए। ऐसे में वैक्सीन को ताकतवर बनाने पर चिंता जारी है ताकि उसके जरिए लोगों को सुरक्षित रखकर तीसरी लहर को रोका जा सके।

लगातार होती रहें वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग
रूप बदलते वायरस और आक्रामकता को लेकर मंथन किया जा रहा है। अभी तक के मंथन में ये निकल कर आया है कि वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग लगातार होनी चाहिए, ताकि वायरस के बारे में पता चलता रहे । उसके हिसाब से वैक्सीन को प्रभावी बनाने पर काम भी चलता रहे। इसके लिए केंद्र सरकार को सुझाव दिया जा रहा है। इसके अलावा हम सभी मास्क जरूर लगाएं। साथ ही कोविड‌ प्रोटोकॉल का भी पूरी तरह से पालन करें और सुरक्षित रहे।

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