बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग पर भड़के जदयू नेता विजेंद्र यादव, बोले- मांग करते-करते हम थक गये…

बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग पर भड़के जदयू नेता विजेंद्र यादव, बोले- मांग करते-करते हम थक गये…

बिहार में लगातार जदयू और भाजपा के बीच बढ़ती जा रही तल्खी. एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने जातिगत जनगणना पर केंद्र सरकार के खिलाफ बोला था हमला. अब उनकी पार्टी ने कहा कि, अब नहीं करेंगे मोदी सरकार से बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग. उन्होंने कहा कि, अब कितना मांग करें, मांग करते-करते थक गये, कोई सुनवाई नहीं हो रही.

द दैनिक बिहार, डेस्क : बिहार में सत्ता के साझीदार दो प्रमुख दल भाजपा और जदयू में तकरार बढ़ते जा रही हैं. बता दें कि, मुख्यमंत्री की कोर कमेटी के सदस्य औऱ बिहार सरकार में योजना-विकास औऱ ऊर्जा विभाग के मंत्री विजेंद्र यादव ने आज पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा की “विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते करते हम थक गये. केंद्र सरकार ने विशेष राज्य के दर्जा को लेकर कमेटी का भी गठन किया था. उसकी रिपोर्ट भी आयी. लेकिन उसके बाद भी कोई फैसला नहीं हुआ. अब कितनी मांग की जाये.”

साथ ही उन्होंने कहा कि, मांग करने की एक सीमा होती है. हमलोग लगातार मांग करते रहे हैं. कबतक अनवरत यही किया जाये. हम लोग अपना काम कर रहे हैं. वैसे, विजेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार केंद्र सरकार से ये मांग करती रहेगी कि वह बिहार को विशेष मदद दे. क्योकि बिहार को सभी क्षेत्रों में विशेष मदद की जरूरत है. इसलिए विशेष मदद मिलनी चाहिये जिसके लिए केंद्र में कोई भी सरकार हो बिहार ये मांग करता रहेगा.

विशेष राज्य के दर्जा के लिए कांग्रेस के साथ जाने को तैयार थे नीतीश कुमार

जाहिर हैं कि, 2005 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार आयी थी. तब से ही बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग हो रही हैं. और 2010 के विधानसभा चुनाव के बाद तो उन्होंने ये एलान कर दिया था कि जो कोई भी पार्टी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगी वो उसका समर्थन कर देंगे. उस समय नितीश कुमार बिहार में भाजपा के साथ चुनाव लडे थे. जबकि केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी. उन्होंने ने ये इशारा कर दिया था कि अगर केंद्र की कांग्रेस सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे दे तो वो कांग्रेस के साथ जाने को भी तैयार है.

क्या हुआ था जब रघुराम राजन ने नहीं की थी सिफारिश

बात करे अगर 2013 की तो केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सरकार ने बिहार समेत देश के कुछ दूसरे राज्यों द्वारा विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर विचार करने के लिए रघुराम राजन कमेटी का गठन किया था. और इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना कि बिहार देश में उड़ीसा के बाद सबसे पिछडा राज्य है. लेकिन रघुराम राजन कमेटी ने किसी भी राज्य को विशेष दर्जा देने का प्रावधान खत्म कर देने की ही सिफारिश कर दी थी. उस समय नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी को सांप्रदायिक करार देकर बीजेपी से नाता तोड़ चुके थे और बिहार में अकेले सरकार चला रहे थे. तब रघुराम राजन कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जदयू के प्रदेश कार्यालय में ढोल नगाड़ा बजाकर जश्न मनाया गया था. और अंत में पता चला कि इस कमेटी ने तो विशेष राज्य का दर्जा देने की कोई सिफारिश ही नहीं की है.

दोनों पार्टियों के बीच लगातार बढ़ रही दूरियां

वही, अब नीतीश कुमार के खास मंत्री विजेंद्र यादव के बयान के बाद फिर से इस बात का संकेत मिलना शुरू हो गया हैं की दोनों पार्टियों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है. क्योकि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने जातिगत जनगणना को लेकर बीजेपी के खिलाफ हमला बोला था. और अब पार्टी के तरफ से विशेष राज्य के दर्जे की मांग नहीं करने का एलान कर दिया गया है.

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